कौन हु मै ?

मिली मुझे एक परी
थोडी घुली थोडी मिली
मुझको थी प्यारी बड़ी
फिर जाने वोह कहा चली
धुंडा उसको गली गली

3 साल बाद फिर मिली
थोडी घुली थोडी मिली
प्यारी है मुझको बड़ी
एक दिन मुझ से बोली
कौन हु मै ?
क्यों हु तुझको प्यारी बड़ी …

मै बस ये ही बोला 
…….
…..
…….

खामोशी की भी है एक जुबान
जो मुझसे कुछ न बुलवाए
बस फिर भी दिल यही चाहे की
काश परी कभी ज़मीन पर भी उतर आये
और आस पास से गुजर जाए
महका जाए मेरे छोटे से संसार को
जिसमें आंधी से भी उड़ कर
तेरी खुशबु नहीं आती
तेरा एहसास जो मेरी बातों में
मेरी रातो में
सुअगातो में
अनजान रास्तो में
उसमें से निकलने की चाहतो में
दरिया में डूब जाने को
उनकी सीपियों में से
तुझे निकलने का
बादलो में
बादलो की हवायो में
तेरी गूंजती आवाज़ है
आवाज़ बुलाती है मुझको
ना जाने कहा
बनाया मुझको वन का हिरन
धुन्धू तुझको बादलो में
सीपियों में सागरों में
अब तो हवा में भी तेरी ही धुन सुनु
और तू मुझसे पूछ जाए
की मै कौन हु ??

सर्दी की रातो में जब भी खिड़की खोलू
तुझे अपनी bike पर बैठा पायु

मेरा कोई दोस्त नहीं इस जहां में
जो मुझको समझ पाए
रातो की हवायों में
तू bike से हाथ हिलाए
और पढने की गुहार लगाये
और कभी सोते वक़्त मुझको लोरी सुनाने आये
चम्पी भी अच्छी सी कर के जाए
ज़िन्दगी के नए राह दिखाए
और फिर भी मुझसे कभी पूछ बैठे
कौन हु मै ??

गर्मी की जलती धुप में
मुझे लस्सी पिलाये
थोडा बतियाये , सुस्ताये
और शाम को
अपने घर के पोधों में
तुझको पानी डालता देखू  
और वहा से जो मिटटी की सौंधी खुशबु आये
मुझे वोह तेरी याद दिलाये

तेरी बारिश शुरू होती है
जिसमें सब गिला गिला है
आंसू नहीं है, यह तो एक ख़ुशी है
की तेरी बारिश आई है
बारिश में भीगती
scooty चलाती सडको पर नज़र आये

वहा से इशारे से बोले
कही छुप जायो
बारिश तेज़ है
मै तो परी हु
मेरा क्या .. ना जाने मै कौन हु ??

छुप जायु तो तू मेरे बगल में आके खड़ी हो जाए
और मेरे छिकने पर खूब हसे
और फिर बोले कौन हु मै ??

मै फिर कुछ ना बोल पायु
हलके से हसू, मुस्करायु
और रात की तन्हाई में
भी कभी आँख बंद करने के बाद
तुझको यह बत्लायु
की प्रतिबिम्ब को कोई क्या बताये
की कौन है तू ???

2 Responses to this post.

  1. Posted by shanky on December 8, 2008 at 4:44 pm

    nice one ….

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