बह रहा हू
कभी हवा तेज़ चली
तो कभी बारिश तेज़ पड़ी
मै तो बस बह रहा हू
कभी उडती पतंग सा
तो कभी पानी की तरंग सा
मै तो बस बह रहा हू
कभी आसमान की छाव में
तो कभी पानी की नाव में
मै तो बस बह रहा हू
कभी ज़िन्दगी के खेल में
तो कभी किसी की गुलेल में
मै तो बस बह रहा हू
कभी दीपक के तेल में
तो कभी हमारे मेल में
मै तो बस बह रहा हू
कभी बिस्तर में सो कर
तो कभी ज़िन्दगी में बहुत कुछ खो कर
मै तो बस बह रहा हू
कभी सपनो से जुड़ कर
तो कभी ज़िन्दगी से मुड कर
मै तो बस बह रहा हू
कभी कनक सा बस कर अमीरों ने लूटा
तो कभी कनक सा बन कर गरीबो ने भी लूटा
मै तो बस बह रहा हू
कभी भारत के झंडे में
तो कभी ज़िन्दगी के पंगे में
मै तो बस बह रहा हू
कभी नोटों की मस्ती में
तो कभी खोटो की बस्ती में
मै तो बस बह रहा हू
कभी चिड़िया की उड़ान में
तो कभी ज़िन्दगी की थकान में
मै तो बस बह रहा हू
कभी पीली सरसों में
तो कभी कल परसों में
मै तो बस बह रहा हू
कभी चुनर की ओढ़ में
तो कभी तड़प की चोट में
मै तो बस बह रहा हू
कभी किसी के साए में
तो कभी कही किसी को देते हुए साए
मै तो बस बह रहा हू
खुशबु से भरे रास्तों में
चाय समोसे के नाश्ते में
मै तो बस बह रहा हू
कभी धुएं की बस्ती में
तो कभी जवानी की मस्ती में
मै तो बस बह रहा हू
कभी किसी के इंतज़ार में
तो कभी किसी इश्तेहार में
मै तो बस बह रहा हू
कभी आँगन के फूल में
तो कभी टूटे कंगन की धुल में
मै तो बस बह रहा हू
कभी आँखों के काजल में
तो कभी आँखों के बादल में
मै तो बस बह रहा हू
कभी चाँद को ताक के
तो कभी सावन में कीचड फांद के
मै तो बस बह रहा हू
कभी लेखक बन के
तो कभी चिन्तक बन के
मै तो बस बह रहा हू
कभी बचपन की हवा में
तो कभी बुढ़ापे की दवा में
मै तो बस बस बह रहा हू
कभी आग़ाज़ के दुख में
तो कभी अंत के दुख में
मै तो बस बह रहा हूँ





you are a wonderful writer…keep writing.. i love reading your writings…. keep up the good work… !!